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Sunday, January 5, 2014

कविता संग्रह 'थैंक्यू मरजीना' से



!! कटान के ख़िलाफ़ !!

झुक गए हैं- बिजली के खम्भे
तार समेत.....

लोट रहे हैं / पसर गए हैं
           -पेंड सड़क पर ...

नहीं है ये सब
किसी आँधी या भूकम्प की
                       करामात

पेंड  सड़क पर लेट गए हैं
              पसर गये हैं -
अपनी कटान के ख़िलाफ़ !

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